राजस्थान NEET पेपर लीक केस में BJP नेता पर गहलोत का बड़ा हमला

राजस्थान में NEET 2026 पेपर लीक मामला अब सिर्फ एक जांच का विषय नहीं रहा बल्कि पूरी तरह राजनीतिक संघर्ष में बदल गया है। इस पूरे मामले के केंद्र में आरोपी दिनेश बिंवाल का नाम सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस प्रकरण को लेकर सरकार और भाजपा पर सीधे गंभीर सवाल उठाए हैं। गहलोत का कहना है कि इतने बड़े पेपर लीक नेटवर्क में शामिल लोगों के राजनीतिक संबंधों की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है ताकि सच सामने आ सके। उनके बयान के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया है।
भाजपा ने आरोपों को बताया निराधार और राजनीतिक साजिश
भाजपा ने गहलोत के सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक दुर्भावना करार दिया है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि दिनेश बिंवाल पार्टी का आधिकारिक कार्यकर्ता नहीं है और केवल किसी के साथ फोटो या सार्वजनिक संपर्क के आधार पर संबंध जोड़ना गलत है। पार्टी का कहना है कि जांच एजेंसियां स्वतंत्र रूप से अपना काम कर रही हैं और विपक्ष इस मामले को बेवजह राजनीतिक रंग दे रहा है। भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस जनता का ध्यान असल मुद्दों से भटकाने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस का पलटवार और सोशल मीडिया पोस्ट से बढ़ा विवाद
मामला तब और गरमा गया जब कांग्रेस नेता टीकाराम जूली ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भाजपा पर पलटवार किया। उन्होंने कुछ ऐसे पोस्ट साझा किए जिनमें भाजपा नेताओं द्वारा आरोपी दिनेश बिंवाल को “भाई” कहकर संबोधित किया गया था। इसके बाद कांग्रेस ने दावा किया कि आरोपी केवल समर्थक नहीं बल्कि संगठन में भी सक्रिय भूमिका निभा चुका है। जूली ने भाजपा पर सच छिपाने और मामले को दबाने का आरोप लगाया और कहा कि जब तक पूरी सच्चाई सामने नहीं आती तब तक सवाल उठते रहेंगे।
पेपर लीक विवाद ने बढ़ाया राजनीतिक और सामाजिक दबाव
NEET पेपर लीक का मामला पहले से ही छात्रों और अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है लेकिन अब इसमें राजनीतिक बयानबाजी जुड़ने से स्थिति और संवेदनशील हो गई है। छात्रों के भविष्य और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं जबकि राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। कांग्रेस जहां सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही है वहीं भाजपा इसे विपक्ष की राजनीति बता रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह विवाद राजस्थान की राजनीति में और बड़ा मुद्दा बन सकता है और जांच के नतीजों पर पूरे देश की नजर टिकी रहेगी।





