NEET-UG 2026 पेपर लीक में बड़ा खुलासा, यूट्यूब क्लास में पहले ही पढ़ाए गए थे असली सवाल

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG-2026 अब सिर्फ परीक्षा नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर का बड़ा विवाद बन चुकी है। पेपर लीक मामले में लगातार नए खुलासे सामने आ रहे हैं और अब जांच सीबीआई के हाथों में पहुंच चुकी है। सूत्रों के मुताबिक पेपर लीक से जुड़े गिरोह ने परीक्षा से पहले यूट्यूब पर 50-50 हजार रुपये की ऑनलाइन क्लास चलाकर छात्रों को कुछ खास सवाल पढ़ाए थे। इन क्लासों में दावा किया गया कि यही सवाल परीक्षा में बेहद अहम साबित होंगे। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कथित गेस पेपर के कई सवाल असली परीक्षा में दिखाई दिए। इससे पूरे सिस्टम पर सवाल उठने लगे हैं। देशभर के छात्र और अभिभावक अब यह जानना चाहते हैं कि आखिर इतनी मजबूत सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद पेपर बाहर कैसे पहुंचा।
NTA की तैयारी मजबूत थी फिर कहां हुई चूक?
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी NTA ने 3 मई को आयोजित हुई NEET-UG-2026 परीक्षा को लेकर बेहद सख्त तैयारी की थी। पहली बार केंद्रीय गृह मंत्रालय। राज्यों और जिला प्रशासन के साथ मिलकर 5432 परीक्षा केंद्रों पर मॉक ड्रिल कराई गई थी। मोबाइल जैमर। बायोमेट्रिक जांच। सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और प्रश्नपत्रों की सुरक्षित डिलीवरी जैसी व्यवस्थाओं को परखा गया था। इसके बावजूद पेपर लीक का आरोप सामने आना जांच एजेंसियों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि जब 3 मई को ही सीकर में सैंपल पेपर और असली प्रश्नपत्र में समानता की खबरें आने लगी थीं तब 7 मई तक NTA और गृह मंत्रालय को इसकी आधिकारिक जानकारी क्यों नहीं भेजी गई। इस देरी ने केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय की कमी को भी उजागर कर दिया है।
दूसरे सेट को सार्वजनिक करने की मांग तेज
पेपर लीक विवाद के बीच अब अभ्यर्थियों और शिक्षा विशेषज्ञों ने NEET के दूसरे प्रश्नपत्र सेट को सार्वजनिक करने की मांग तेज कर दी है। सोशल मीडिया पर छात्रों का कहना है कि कथित गेस पेपर में कुल 300 सवाल थे जिनमें से करीब 150 सवाल परीक्षा में दिखाई दिए। छात्रों का दावा है कि बाकी 150 सवाल शायद दूसरे सेट से जुड़े हो सकते हैं। इसी वजह से दूसरे सेट को सार्वजनिक करने की मांग की जा रही है ताकि यह साफ हो सके कि मामला केवल संयोग था या फिर दोनों सेट पहले से बाहर पहुंच चुके थे। जानकारी के मुताबिक परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले NTA के वरिष्ठ अधिकारी यह तय करते हैं कि कौन सा सेट इस्तेमाल होगा। इसका पासवर्ड भी कई अधिकारियों के बीच विभाजित रहता है। ऐसे में दोनों सेट बाहर पहुंचना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सीकर फिर बना शक के घेरे का केंद्र
राजस्थान का सीकर जिला एक बार फिर जांच एजेंसियों और शिक्षा जगत के निशाने पर आ गया है। इससे पहले साल 2024 में भी यहां असामान्य रिजल्ट पैटर्न सामने आया था। उस समय हजारों छात्रों के 600 से अधिक अंक आने पर सवाल उठे थे। अब 2026 के पेपर लीक मामले में भी सीकर का नाम सामने आने से संदेह और गहरा गया है। माना जा रहा है कि कोटा के बाद तेजी से उभरे इस कोचिंग हब में बड़े स्तर पर संगठित नेटवर्क काम कर रहे हो सकते हैं। हालांकि अदालतों में अब तक सांख्यिकीय आंकड़ों की बजाय ठोस सबूतों को प्राथमिकता दी गई है। लेकिन इस बार मामला देशभर के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा है इसलिए जांच एजेंसियों पर भारी दबाव है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या सीबीआई इस पूरे नेटवर्क की परतें खोल पाएगी या फिर यह मामला भी पुराने विवादों की तरह अधूरा रह जाएगा।





